दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) से जानना चाहा कि विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को एशियन गेम्स के ट्रायल से छूट देने का आधार क्या है? जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने फोगाट और पूनिया को छूट को चुनौती देने वाली पहलवान अंतिम पंघाल और सुजीत कलकल की याचिका पर डब्ल्यूएफआई को नोटिस जारी किया है और कहा है कि अदालतें मामलों को भटकने की अनुमति नहीं दे सकती हैं।

अंतिम पंघाल ने बुधवार को अपने बयान में ये भी कहा था कि विनेश फोगाट में ऐसा क्या खास है, जो उनका ट्रायल नहीं होगा।

इस मसले पर जस्टिस प्रसाद ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “इन दोनों व्यक्तियों के चयन का आधार इस तथ्य के अलावा क्या है कि वे अच्छे खिलाड़ी हैं? क्या आपने किसी प्रकार की चयन प्रक्रिया की है। पूरे मामले से ऐसा लगता है कि किसी प्रकार का ट्रायल होना चाहिए। याचिकाकर्ता मानते हैं कि जिन दो पहलवानों को आपने चुना है या देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उनकी क्षमता या योग्यता पर संदेह नहीं है। इसमें किसी भी प्रकार का संदेह नहीं है। वे जो कहते हैं वह यह है कि केवल पिछला प्रदर्शन उन्हें (खेलों के लिए) भेजने का आधार नहीं हो सकता।”

हाई कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की ओर से पेश वकील से गुरुवार तक जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए टाल दिया है। केंद्र सरकार की ओर से एडीशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि छूट की नीति वेबसाइट पर है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने उनसे नियमों पर अधिक जानकारी के साथ शुक्रवार तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। पंघाल और कलकल की याचिका में मांग की गई है कि दो श्रेणियों (पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा और महिलाओं की 53 किग्रा) के संबंध में आईओए एडहॉक कमिटी द्वारा जारी निर्देश को रद्द कर दिया जाए और बजरंग और विनेश को दी गई छूट को भी कैंसिल कर दिया जाए।

ये भी विनेश फोगाट में क्या खास है जो उसे एशियन गेम्स ट्रायल से छूट दी गई, अंतिम पंघाल ने उठाए सवाल

पहलवानों की ओर से डाली गई याचिका में मांग की गई है कि किसी भी पहलवान को कोई छूट दिए बिना ट्रायल निष्पक्ष तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए। इससे पहले IOA एडहॉक पैनल ने बजरंग पुनिया (65 किग्रा) और विनेश (53 किग्रा) को 22-23 जुलाई को होने वाले ट्रायल से छूट देने का फैसला किया था। एडहॉक पैनल के निर्देश के अनुसार, 65 किग्रा और 53 किग्रा सहित सभी 18 भार वर्गों में परीक्षण आयोजित किए जाएंगे, लेकिन विजेता एशियन गेम्स में प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगे, बल्कि वे स्टैंडबाय विकल्प होंगे।

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