मॉनसून का इंतजार खत्म हो गया है। केरल के तट पर मॉनसून ने दस्तक दे दी है और अगले दो दिनों में दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी इसका असर देखने को मिलेगा। इस साल मॉनसून एक सप्ताह की देरी से आया है।

अमूमन 1 जून को ही मॉनसून की शुरुआती होती है, लेकिन इस बार यह पूरे 7 दिन की देरी से चल रहा है। मौसम विभाग ने शुरुआत में इसके 4 जून तक आने की बात कही थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर 7 जून कर दिया था। अंत में यह 8 जून को ही आया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले सप्ताह में मॉनसून की रफ्तार बिपरजॉय चक्रवात के चलते कमजोर रहेगी।

मौसम विभाग ने अपने बयान में कहा है कि अगले 24 घंटों में पूरे केरल में मॉनसून सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद 48 घंटों के भीतर तमिलनाडु, कर्नाटक, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण पश्चिम क्षेत्र में इसका असर देखने को मिलेगा। फिर धीरे-धीरे मध्य भारत होते हुए यह उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों तक पहुंचेगा। वैज्ञानिकों ने कहा कि दक्षिण पूर्व अरब सागर बिपरजॉय चक्रवात के असर से मॉनसून में देरी हुई है और शुरुआती सप्ताह में इसकी रफ्तार भी धीमी रहेगी।

हालांकि एक बार बिपरजॉय का असर समाप्त होगा तो फिर मॉनसून रफ्तार पकड़ लेगा। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत ने कहा कि अगले दो से तीन दिन में पछुआ हवा तेज होगी और फिर मॉनसून जोर पकड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को बुआई के लिए तय समय से एक सप्ताह से 10 दिन तक का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि एक बार जब बारिश शुरू होगी तो फिर बुआई भी चालू हो जाएगी। खेती और फसल पर मॉनसून में देरी का कोई विपरीत असर नहीं होगा। हालांकि जून महीने में सामान्य से कुछ कम बारिश होने की संभावना है।

आमतौर पर मॉनसून 1 जून तक केरल पहुंचता है और फिर 15 जुलाई तक पूरे देश में सक्रिय हो जाता है। लेकिन इस बार मौसम विभाग ने 16 मई को ही अनुमान जाहिर किया था कि यह 4 जून को आएगा, लेकिन अंत में एक सप्ताह की देरी के बाद ही आया है। भारत में मॉनसून की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि 51 फीसदी खेती योग्य भूमि सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर रहती है। इन्हीं इलाकों से 40 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन होता है। यही वजह है कि अच्छा मॉनसून खेती और इकॉनमी के लिए गुड न्यूज के तौर पर देखा जाता है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार बारिश औसत से 96 फीसदी रहेगी। ज्यादातर इलाकों में यह सामान्य ही रहेगा।

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